Monday, September 27, 2021
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धर्मान्तरण के बढ़ते कदमों को कैसे रोका जाए ?

धर्मान्तरण के बढ़ते कदमों को कैसे रोका जाए ? मुगलों व अंग्रेजों के काल में करोड़ों लोग भय लोभ लालच…

By Bakaiti Baba Desk , in देश , at September 4, 2020 Tags: ,


धर्मान्तरण के बढ़ते कदमों को कैसे रोका जाए ?

मुगलों व अंग्रेजों के काल में करोड़ों लोग भय लोभ लालच आदि में आकर मुसलमान ईसाई हो गए। बौद्ध काल में करोड़ों लोग बौद्ध हो गए । आज भी यह सिलसिला जारी है । पादरी लोग चुपचाप अपने काम में लगे हुए हैं। जो एक बार मुसलमान ईसाई वा बौद्ध हो जाता है वह वापस आने को तैयार नहीं होता। धर्मान्तरण के मुख्यत: चार कारण हैं-

१. हिन्दुओं में व्याप्त अन्धविश्वास,पाखंड,जातपात व छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियां ।

२. करोड़ों साधु-संतों का अज्ञानी आलसी प्रमादी होकर पड़े रहना । ग़रीब बस्तियों व दूरदराज क्षेत्रों में जाकर धर्म का प्रचार न करना।

३. मन्दिरों में पड़ी अकूत धन सम्पदा को दबे कुचले लोगों की सहायता पर खर्च न करना । मन्दिरों में शिवलिंग पूजा, गणेशपूजा, महाकाल पूजा, आठ आठ हाथ वाले देवी देवताओं की पूजा, मूर्तियों में प्राण-प्रतिष्ठा का नाटक अब छोड़ना होगा। मूर्त्तियां लगानी ही हैं तो केवल राम और कृष्ण जी की सुंदर सुंदर मूर्तियां लगाओ, उनके पदचिन्हों पर चलो, मन्दिरों में सुबह शाम यज्ञ और विद्वानों के प्रवचनों की व्यवस्था करो ।

४. वेदादि शास्त्रों की सही सही जानकारी न होना और वेद विरुद्ध कथित अठारह नवीन पुराण आदि अनार्ष ग्रन्थों को अधिक महत्व देना ।

आवश्यकता है इन चार कारणों को दूर करने की । आवश्यकता है कि हम हिन्दू मुसलमान ईसाई जैन बौद्ध आदि के लिबासों को उतार कर सच्चे मनुष्य बनें ,श्रेष्ठ बनें ,आर्य बनें और केवल वेद को ही अपना धर्म ग्रन्थ मानें | धर्म परिवर्तन मूढ़ता व देश के साथ गद्दारी करने जैसा है । तन्त्र पुराण कुरान बाइबिल आदि अनार्ष ग्रन्थ काल्पनिक किस्से कहानियों से भरे पड़े हैं | अब यदि हम सृष्टि उत्पत्ति का ही विषय लें तो बाइबिल का सिद्धान्त कहता है कि चौथे आसमान पर बैठे ईश्वर ने अपनी दोनों पसली निकाली और धरती पर फैंक दिया | जिनमें एक से आदम और दूसरी पसली से हव्वा का जन्म हुआ और उन्हीं से इस सष्टि की शुरूआत हुई | ये कौन सा वैज्ञानिक सिद्धान्त है कि पसली से मानव पैदा हो रहा है ? आकाश” को एक वचन अर्थात् “आकाश” ही पढ़ाया जाता है न कि “आकाशों” | व्याकरण की दृष्टि से कि “आकाश” शब्द एक वचन है । जब “आकाश” एक है तो फिर ये चौथा,सातवां आकाश कहां से आ गये ? और ईश्वर या खुदा वहीं चौथे या सातवें आसमान पर ही क्यों रहता है बाकि आसमान पर क्यों नहीं ? हिन्दू मथुरा, काशी,गोलोक, बैकुंठ, कैलाश मानसरोवर आदि में ईश्वर का निवास मानते हैं ! पुराण कुरान में भी सृष्टि उत्पत्ति व ईश्वर के निवास को लेकर अजीबोगरीब कहानियां हैं। वेद सृष्टि उत्पत्ति का वैज्ञानिक आधार बताते हैं जिसका वर्णन ऋषि दयानंद ने सत्यार्थप्रकाश के आठवें अध्याय में भी किया है ।

हमारे पास विश्व में सर्वोत्तम ज्ञान-विज्ञान का भण्डार चार वेद हैं, ग्यारह उपनिषद हैं, छः दर्शन हैं । परन्तु हमारे तथाकथित धर्म गुरूओं को रंग बिरंगे वस्त्र पहन भागवत कथा करने से ही फूर्सत नहीं है ! करोडों लोग ज्योतिर्लिंगों को भगवान मानते हैं, करोड़ों लोग जगन्नाथ की मूर्ति को भगवान मानते हैं । करोड़ों लोग ज्योतिषियों व चिन्मयानंद, रामरहिम, रामपाल, आसाराम , निर्मल बाबा, राधे माँ आदि के चक्कर में पड़े हैं , नेता लोग वोट बैंक के चक्कर में इन पाखंडियों व बलात्कारियों के चरणों में माथा टेकते हैं। संविधान ने धर्मनिरपेक्षता का कानून बना कर अपना पल्ला झाड़ लिया है। धर्म निरपेक्षता का यही अर्थ लिया जाता है कि आस्था के नाम पर सबको हर तरह का अन्धविश्वास पाखंड मानने व उसका प्रचार करने की खुली छूट है , स्वेच्छा से धर्मान्तरण करने कराने की भी खुली छूट है ।

अब धर्म की रक्षा करे तो कौन करे ? कहते हैं – वो तो भगवान कृष्ण अवतार लेकर कर ही करेंगें….क्योंकि उन्होंने गीता में अर्जुन से वायदा जो किया है | वाह रे आलसियों ! ईसाई और मुललमान रात के घनघोर अन्धेरे की तरह बढते ही जा रहे हैं ,हमारी वैदिक संस्कृति-सभ्यता को समाप्त करने में लगे हैं, और तुम कुछ नहीं कर पा रहे !

वेद नहीं पढ़ सकते तो कम से कम सत्यार्थप्रकाश ही पढ लो। वीर सावरकर कहते थे “सत्यार्थप्रकाश हिन्दुओँ की ठण्डी नसों मेँ गर्म रक्त का संचार करने वाला ग्रंथ है, इसकी मौजूदगी में कोई विधर्मी अपने मजहब की शेखी नहीँ बघार सकता” इस क्रान्तिकारी धर्म ग्रंथ ने करोड़ों लोगों को अन्धविश्वास पाखंड व मतमतांतरों की बेड़ियों से मुक्त कर धर्म अर्थ काम व मोक्ष की सच्ची राह दिखाई है, करोड़ों लोगों को पण्डों मौलवियों पादरियों के मकड़जाल से छुड़वाया है, करोड़ों विधर्मियों को पुनः वैदिक धर्मी बनाया है ।। अपना धर्म छोड़ कर ईसाई मुसलमान हो जाना देश के साथ गद्दारी करने जैसा है | वीर हकीकत राय ने सिर कटवा दिया परन्तु अपना धर्म नहीं छोडा | धिक्कार है ऐसे लोगों पर जो किसी लोभ लालच में आकर अपना धर्म छोड़ कर ईसाई या मुसलमान बन जाते हैं ।

हमारे सब ऋषि मुनि और राम कृष्ण जैसे सब महापुरुष वेद को ही अपना धर्म ग्रंथ मानते थे। करोड़ों वर्ष पुरानी हमारी गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में सब बच्चों को भी वेद ही पढाए जाते थे । वेद और वेद पर आधारित सत्यार्थप्रकाश का प्रचार प्रसार करने से ही धर्मान्तरण रुक सकता है । धर्मान्तरण के मुख्य चार कारणों का निवारण करना भी बहुत आवश्यक है।
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– डा मुमुक्षु आर्य

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